Shayari (शायरी)
ख़ामोशी और तन्हाई — गहरा हिंदी-उर्दू शेर
कुछ लोग ख़ामोशी से चले जाते हैं, मगर उनकी ख़ामोशी कभी नहीं जाती। वो जो कह न सके किसी महफ़िल में, वो बात तन्हाई में समझ आती है।
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Reflection & Context
एक गहरा एहसास उस ख़ामोशी के बारे में जो लफ़्ज़ों से ज़्यादा भारी होती है और तन्हा रातों में गूंजती है।
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