ज़िंदगी का सच
Published on Sep 29, 2026 • PoetryKitaab Archive
Stanza Text
मंज़िल मिले ना मिले ये मुक़द्दर की बात है, दर्द रहता है मगर इंसान जीना सीख जाता है।
Published on Sep 29, 2026 • PoetryKitaab Archive
मंज़िल मिले ना मिले ये मुक़द्दर की बात है, दर्द रहता है मगर इंसान जीना सीख जाता है।